कुछ तुम्हारी शराब थी।
कुछ कमी थी मुझमें कुछ तुम्हारी ये शराब थी। मैंने तो इश्क तुमसे ही किया था पर तुम्हारी आदत ही खराब थी। हर बात पे नाराज़ हो जाता था दिल तुम्हारा फिर भी मेरे लिए वो समझदार था। प्यार तो तुम ही थे मेरा बस तुम्हारे जीने का तरीका ख़राब था। तुम्हारे मुस्कुराने से कभी कभी दिल मेरा बहुत खुश होता था। चाहकर भी तुम मुझसे नहीं मिलते थे ये सोच कर बहुत दुख होता था। क्या करती तुम्हारी आदत सी हो गई थी। क्योंकि मेरे चारों और बस तुम्हारी ही आवाज थी। कुछ कमी थी मुझमें कुछ तुम्हारी ये शराब थी। मैंने तो इश्क तुमसे ही किया था पर तुम्हारी आदत ही खराब थी। वो पल भी याद नहीं होंगे जो तुमको देख कर मैंने अपने दिल में बसाए थे। आज भी याद है मुझे तुम पहली बार मुझसे बात करके कितना घबराए थे। दिल पे हाथ रख कर तुम मेरी गलतियां गिना करते थे। फिर भी माफ करने के बाद तुम हमको इतना रुलाए थे। कैसे भूल जाऊं तुमको तुम्हारी बातें ही तो मेरा जवाब थी। कुछ कमी थी मुझमें कुछ तुम्हारी ये शराब थी। मैंने तो इश्क तुमसे ही किया था पर तुम्हारी आदत ही खराब थी।