तेरी मेरी कहानी...

काश तू मेरे सामने बाले मोहले में रहती और मै रोज तुमको देखने के लिए आंगन में टहलता।पढ़ने के बहाने तुम बालकनी में मुझे देखने आती।और मुझे भी उसी समय तुम्हारे घर के नीचे महफ़िल सजानी होती।
काश तेरी मेरी भी ऐसी कोई कहानी होती।


मै तुमसे प्यार करता और तुम मुझसे नफरत करती।तेरे पीछे कोई छिछोरा घूमता और तु मुझसे डरती .तेरा डरना भी और मेरा प्यार करना भी एक जिंदगानी होती।
काश तेरी मेरी भी ऐसी कोई कहानी होती।


तुझे देखने के लिए तेरे घर के सामने  चाय की दुकान पर तेरा इंतज़ार करता।तु ठीक 8:००बजे  बस से  कॉलेज के लिए निकलती और मै तेरी आंखों से बात करता।और एक दिन गलती से तेरी बस छूट जाती और मै दोस्त की बाइक लेकर तेरे सामने खड़ा हो जाता ।रोज तुझे कॉलेज छोड़ने से मेरी बाइक भी तेरी दीवानी होती।
काश तेरी मेरी भी ऐसी कोई कहानी होती।



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