कुछ समझाना है आपको.... अगर नेताओं से रखोगे दूरी... तभी आप ज़िन्दगी जीयेंगे पूरी..

Namskaar ,
satshiriakaal,
Kaise hain aap sab..
Aache hee honge meri tarah..
Mai aapka sharma ji bahut dino baad kuch leke aaya hoon..
Kuch apne dil ki baatain aapko btaane ke liye..
Toh chalo shuru karte hain..

शहर में कैद हो गया एक आजाद परिंदा,
वो खुद को खुले आसमां में उड़ाना चाहता है।
ये दुनिया ताने दे दे कर मार डालेगी उसे,
वो सबके मुंह बंद करवाना चाहता है।
कोशिश कर रहा है हर बार पंख फैलाकर उड़ने की,
मगर हर बार नाकाम हो जाता है।
अभी हिम्मत नहीं छोड़ी उसने वो मौका देख रहा है तेज हवा चलने का,
क्योंकि उसने विश्वास रखा है ख़ुदा पे वो उस विश्वास को आजमाना चाहता है।
सब लगे है जहर को मिटाने में,
मगर वो उसमे खंजर चुभाना चाहता है।
झूठी मोहब्बत तो बहुतों ने दिखाई,
अब वो परिंदा खुद की नफरत फैलाना चाहता है।
जिन जिन लोगों ने उसके लिए अपने घर के दरवाजे बंद किए थे,
वो आज उन घरों में आग लगाना चाहता है।
गलियों में जो घुमा करते थे बिना किसी वजह के,
आज वो उनको मास्क पहनाना चाहता है।
कितना गीरोगे पैसों के लालच में,
नेताओं के पालतू कुतों को बीच सड़क पे दौड़ाना चाहता है।
ये मिट्टी है उस हर हिंदुस्तानी की जो तिरंगे के लिए अपनी जान देते हैं,
वो परिंदा हिंदुस्तान को धोखा देने वाले को इस मिट्टी में दफनाना चाहता है।
जिन मा बाप ने अपनी औलादों को हद से ज्यादा सिर पे चढ़ा के रखा है,
वो उन हरामियों को बीच चौराहे पे लटकाना चाहता है।
जिन्हे तमीज नहीं सिखाई किसी की इज्जत करने की,
वो आज उनको उनकी औकात दिखाना चाहता है।
तुम नेता लोग करते रहो बकचोदी अपनी कुर्सियों को संभालने में,
मगर वो परिंदा बस इंसानों को समझाना चाहता है।
तुम न्यूज वाले टीआरपी बढ़ाओ अपने चैनलों की,
तुमको क्या फर्क पड़ता है
पंडित के जल जाने से,
और किसान के मरजाने से।
तुम लोगों को तो ताज़ी ताज़ी न्यूज चाहिए।
चाहे वो मिले नेताओं के गुदगुदाने से।

जनता के वोट को तुम नेता लोग नोट समझ के उड़ाते हो।
दिन में साले एक दूसरे की बुराई करते हो,
और
रात को छत पे बैठ के जाम लगाते हो।

जब से हिंदुस्तान को डिजिटल इंडिया क्या बनाया ।
सब नेताओं का शायर जाग के बाहर आया।
महफिलें जमा देते हैं भाई ट्वीटर पे,
जब से सोशल मीडिया का जमाना क्या आया।

नोट:
नेताओं का भाषण छोड़ के अपने आस पास के लोगों की
हेल्प करिए,
नेता लोग 5 साल के लिए आएंगे, नई नई योजनाएं लाएंगे,
और 5 साल के बाद बदल जाएंगे।
फिर कोई और नेता आएंगे,
वो कोई और योजना बनाएंगे,
5 साल बाद वो भी चले जाएंगे।।
मगर आपको 5 साल में थोड़ी बदलना है।
तो उनके लिए 5 साल बर्बाद करने से अच्छा है अपने आसपास लोगों की मदद करिए, 50 साल का आशिर्वाद तो मिलेगा।


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