जानी को क्यों इतना बदनाम करते हो।

 जाना मोहब्बत तो तुम हज़ारों से शरेआम् करते हो।

फिर जानी को क्यों इतना बदनाम करते हो।।


तुम्हारे होंठों पे जीकर किसी और का होता है।

तुम्हारी बाहों में लिपटा कोई और होता है।।

खुआब तो तुम्हारे बस मैं ही देखती हूं,

तुम्हारे खयालों में तो कोई और ही होता है।।


जाना क्यों मुझसे छिप छिप के किसी और की बाहों में आराम करते हो।

मोहब्बत तो तुमसे पूरी हुई नहीं, फिर जानी को क्यों इतना बदनाम करते हो।।


हमारा रोना भी जरूरी था, तुम्हारा मुस्कुराना भी जरूरी था।

हमारा नाराज होना भी जरूरी था, तुम्हारा मनाना भी जरूरी था।

सोचा नहीं कभी हमने कि ये दुनिया क्या सोचेगी तुम्हारे बारे में,

लेकिन दुनिया को तुम्हारा मतलबी चेहरा दिखाना भी जरूरी था।।


मेरी आंखों में आंखें डाल के मेरे जिस्म का कत्लेआम करते हो।

मोहब्बत तो तुमसे एक निभाई नहीं जाती, फिर जानी को क्यों इतना बदनाम करते हो।।


नशे कई किस्म के तुम खुलेआम करते हो।

फिर जानी को क्यों इतना बदनाम करते हो।।


जरा उनको भी तो पता चलना चाहिए जो तुमको शरीफ समझते हैं।

उनको भी बताओ कि तुम जिस्म के साथ कौन सा काम करते हो।

जानी ही पागल है जो सिर्फ जाना का फिकर करती रहती है।

फिर भी जानी को ही बदनाम करते हो।।


जाना मोहब्बत तो तुम हज़ारों से शरेआम् करते हो।

फिर जानी को क्यों इतना बदनाम करते हो।।



Comments

  1. Just wow wow wow wow wow wow wow wow wow wow wow wow ❤️❤️❤️❤️❤️❤️👍❤️❤️🤘🤘🤘🤘🤘🤘🤘

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  2. Shayar ki mohabbat ko theri😬

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