अनजान राह पे अनजान इश्क़ से मुलाकात हो गई💝💞(२)
सिगरेट मेरे दिमाग को शांत करने के लिए बहुत जरूरी थी,
मैं पहली बार जो रूठा था जानी से तो आज वानी से मुलाकात तो जरूरी थी।
वैसे भी वानी इंतज़ार कर रही थी मेरा क्योंकि उसकी अभी कहानी अधूरी थी।
मै पहुंच गया वहां जहां उस से कल मिला था।
वो बेंच पे बैठ के बिना पलक झपकाए देख रही थी मेरी आंखों को,
क्योंकि उस पार्क में बहुत से फूलों को बगीचा जो खिला था।
कल जिस बेंच पे मै बैठा था आज उस पे वो बैठी थी,
उसके सामने वाले बेंच पे मैं बैठ गया।
वैसे भी आज वो कल से ज्यादा खूबसूरत लग रही थी,खुशी से उसका चेहरा जो खिला था।
वो बोली शायर जी आप आज इतना लेट क्यों आए हो
मैंने बोला वानी जब कल घर गए थे तो मिलने का कौन सा आप टाइम बताए हो।
शायर जी ये वानी कौन है।
मैंने कहा : ना कल आप अपना नाम बताए थे,
ना दिल का कोई पैगाम बताए थे,
सोचते रह गए हम पूरी रात बैठकर,
ना जाने हम अपने ख्यालों में आपका नाम वानी क्यों लाए थे।
उसने कहा: मालूम था हमें शायर जी,
आप सोचोगे ही हमारे बारे में,तभी तो हम आपको अपना नाम नहीं बताए थे,
शायरी की गलियों में जो जाना था हमें इसलिए तो हम आपके पास आए थे।
मैंने कहा: पहले से ही जानते थे हमें या फिर कल ही मुलाकात हुई।
मैंने तो पहले कभी देखा नहीं आपको मेरी तो कल ही आपसे बात हुई।
उसने कहा : आप हमारे घर के सामने से तब निकलते हो जब हम बालकनी मैं बैठे होते हैं।
आते जाते टाइम हमेशा अपने मोबाइल पे पंजाबी गाने बजाए होते हैं।
जब भी देखती थी मैं आपको आप तब कुछ ना कुछ सोच रहे होते थे,
वैसे भी पंजाब के लोग शरीफ कम शायर ज्यादा होते हैं।
मैंने कहा: ओए वानी,
ना मैं पंजाब से हूं और ना मुझे कोई शायरी आती है।
मैं अपने दिल की कहानियां लिखता हुं,
जो मेरी कलम मुझसे लिखवाती है।
उसने कहा : लिखते तो हो ना शायरी जी,
मुझे भी घूमना है शायर की गलियों में ले चलोगे क्या,
मुझे मोहब्बत हो गई अगर आपसे तो आप भी मोहब्बत करोगे क्या।
मैंने कहा : आपसे पहले भी शायर की गलियों में कोई आया था,
भुला नहीं था मोहब्बत को अपनी फिर भी शायर से मोहब्बत करने आया था।
खुद का इतना वक्त दे दिया उसने शायर को, कि शायर को लगा कि वो उस वक्त को ही जीने आया था
अचानक से एक दिन वक्त भूल गया खुदा देने को,
वो शख्स उस दिन शायर को बहुत रुलाया था।
उसने कहा : शायर जी मैं भूल गई हुं मोहब्बत को अपनी , अब किसी से मोहब्बत करने का मन नहीं करता।
आपके अल्फ़ाज़ खींच लेते हैं मोहब्बत को ,आपके अल्फाजों के बिना अब मन नहीं लगता।
मैंने कहा : अल्फाजों से मोहब्बत करते हो तो हर रोज यहां मुलाकात करूंगा,
आप अपने दिल की बात मत बताना सिर्फ मैं ही अपने दिल की बात करूंगा।
मैं आज भी जानी से मोहब्बत करता हुं वो नहीं करती तो क्या हुआ।
उसको अगर मिलना होगा तो वो आएगी जरूर मैं बैठ के सिर्फ उसका इंतज़ार करूंगा।
उसने कहा : शायर जी , तो आप मुझे जानी के बारे में कब बताओगे।
उस से ही मोहब्बत करोगे हमेशा या थोड़ी मोहब्बत खुद को हमसे भी करवाओगे।
मैने कहा: वानी बात ऐसी है ये मोहब्बत प्यार किसी से भी हो सकते हैं।
लेकिन जो दिल से निभाए मोहब्बत को, दिल की बातें सिर्फ उसको ही बता सकते हैं।
तो मैंने तो अपने सारे राज खोल दिए आपके सामने, आपके दिल में कुछ तो हलचल हुई होगी।
मैं अपने दिल के अल्फ़ाज़ बता रहा हुं आपको तो थोड़ी सी तो मोहब्बत मुझे भी हुई होगी।
उसने कहा : शायर जी आज के अल्फाजों को यहीं रोक लेते हैं कल वानी की नहीं सिर्फ जानी की बात होगी।
By बोल के चली गई।
✍️👌 Great imagination..
ReplyDeleteBaise aap toh kabhi mile hee nhi
VAANI se..
Kamal ka likhte ho 👌👌
💖💖💖💖💖🤘
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