शायद ? तुम आओगी.….

 तुम्हारे इंतज़ार में बैठा है कोई ये सोच कर की शायद तुम आओगी,

भले ही मिलने के लिए नहीं मगर हाँ एक नजर देखने तुम आओगी।

आओगी तुम उसे ये बताने कि जिसको तुम इतना खास समझते हो वो उतना खास है नहीं,

जिसे तुम अपने दिल के पास समझते हो उसे तुम्हारे दिल का एहसास है नहीं।

उसकी आँखों के सामने से तुम उसको बिना देखें निकल जाओगी।

तुम्हारे इंतज़ार में बैठा है कोई ये सोच कर की शायद तुम आओगी।


उसे ये भी पता है कि तुम मोहब्बत् नहीं करती उस से फिर भी वो मोहब्बत बेहिसाब लेके बैठा है।

हाँ बैठा है वो इस उम्मीद से कि एक नज़र देखने तुम आओगी।

तुम्हारे इंतज़ार में बैठा है कोई ये सोच कर की शायद तुम आओगी।


बातें वो अपने दिल की बताना चाहता है तुम्हें,

इश्क़ प्यार मोहब्बत सब बेपनाह् करता है,

मगर इस चीज़ का वो अहसास भी नहीं दिलाना चाहता है तुम्हें। 

हाँ वो बताना चाहता है तुम्हें कि तुम खास तो हो उसके लिए मगर कितने हो ये भी बताना जरूरी है।

तुम्हें भी तो पता चलें कि उसकी मोहब्बत तुम्हारे बिना कितनी अधूरी है।

शायद इसलिए बैठा है वो दो कप कॉफी के लिए हुए,

ताकि साथ में बैठ के पीने के लिए शायद तुम आओगी।

तुम्हारे इंतज़ार में बैठा है कोई ये सोच कर की शायद तुम आओगी,

भले ही मिलने के लिए नहीं मगर हाँ एक नजर देखने तुम आओगी।





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