चाय पर मुलाकात 📸☕
एक हाथ में चाय का कप और दूसरे हाथ में उसका हाथ होना चाहिए।
सामने बैठा कुर्सी पर एक चेहरा मेरी आंखों के पास होना चाहिए।
कोई डूबा देना मुझे उन आंखों में जिन आंखों का मुझे अहसास होना चाहिए।
और मिल जाए वो मुझे जिस पल में वो लम्हा कुछ खास होना चाहिए।
एक हाथ में चाय का कप और दूसरे हाथ में उसका हाथ होना चाहिए।
जब आएगी वो मुझसे मिलने तब मैं भी उसके लिए अपना एक दिन लाऊंगा ।
कैद करके आंखों में उसका चेहरा फिर रातों को एक खुआब सजाऊंगा।
मैं भी धीरे धीरे चाय पी कर उसके साथ थोड़ा सा वक्त बिताऊंगा।
वो हर बार जल्दी में रहेगी और मैं हर बार उसे चाय पे बुलाऊंगा।
मिलने को तो मैं हर रोज उस से चाय पर मिल लूं बस मिलने के लिए उसका साथ होना चाहिए।
एक हाथ में चाय का कप और दूसरे हाथ में उसका हाथ होना चाहिए।
महफ़िल में लगी वो कुर्सी उसके इंतजार में खास होनी चाहिए।
दोनों की एक ही वक्त पर मिलने की खुआविश बेहिसाब होनी चाहिए।
वो हर रोज़ पूछेगी मेरा हाल मुझसे उसको बताने के लिए मेरी तबियत ठीक भी होनी चाहिए।
और मैं लिखूं जिस उम्मीद से ये शायरी उसमे उसके लिए कुछ तारीफ़ भी होनी चाहिए ।
मैं फिर से बुलाऊंगा उसको चाय पर बस उसे काम से छुट्टी एक वीक की होनी चाहिए।
वो हर रोज़ पूछेगी मेरा हाल मुझसे उसको बताने के लिए मेरी तबियत ठीक भी होनी चाहिए।
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