तेरी मेरी कुछ तो कहानी है..

ये बात आज की नहीं दोस्तों ये दास्तां कुछ पुरानी है।
ये मेरी दोस्ती की नहीं ये मेरी मोहब्बत की कहानी है।

ये एक तरफा मोहब्बत भी अजीब सी होती है ।
दूर होकर भी वो लड़की दिल के करीब होती है ।
कभी कभी ऐसा लगता है जैसे वो भी मुझे याद करती होगी।
ये एक तरफी मोहब्बत भी साली कम्बख़त चीज होती है।
इसकी शरीफी का तो पता नहीं लेकिन बत्मीज बहुत होती है।

लेकिन कर भी क्या सकते हैं मोहब्बत जो है दिल से तो निभानी है।

ये बात आज की नहीं दोस्तों ये दास्तां कुछ पुरानी है।
ये मेरी दोस्ती की नहीं ये मेरी मोहब्बत की कहानी है।

उसको खुद ही पता नहीं था कि कोई उसकी स्माइल देखने रोज आता था।
जो शरेआम सब कुछ कहता था वो तुमको कुछ कहने से घबराता था।
कैसा दिल था यार मेरा भी साला हर बार डर जाता था।
निगाहों को उसके होंठो पर टिका के जब वो उसकी हंसी देखता था।
तो साला दिल पागल होकर धड़कने बढ़ा जाता था।

लेकिन उसको कैसे बताऊं कि वो मेरे खुआवों की रानी है।

ये बात आज की नहीं दोस्तों ये दास्तां कुछ पुरानी है।
ये मेरी दोस्ती की नहीं ये मेरी मोहब्बत की कहानी है।

उसको हर रोज अपने दिल की दास्तां बताना चाहता हुं,
लेकिन वो मुझसे कभी बात नहीं करेगी।
शायद उसको ये मोहब्बत पसंद  नहीं इसलिए वो मेरे दिल को कभी याद नहीं करेगी।
फिर भी क्या फर्क पढ़ता है एक तरफा मोहब्बत तो हमेशा अधूरी ही रहती है।
शायद ये किस्मत मेरी इस मोहब्बत को भी कभी मुकमल नहीं करेगी।
उसको सच बता भी दूं तो भी वो विश्वास नहीं करेगी।
मै जानता हूं उसको, उसकी ये आदत भी बहुत पुरानी है।

ये बात आज की नहीं दोस्तों ये दास्तां कुछ पुरानी है।
ये मेरी दोस्ती की नहीं ये मेरी मोहब्बत की कहानी है।

जब भी वो मेरे सामने आती थी तो मुझे खुशियां दे जाती  थी।
शायद बदले में मुझसे मेरे दिल की तनहाइयां ले जाती थी।
कुछ तो था उसकी स्माइल में जो मैं आज तक उसको भूल नहीं पाया।
वो हर रोज खुअवों में आके मेरे दिल में शहनाइयां बजा के जाती थी। 
अब मुझे एक तरफा मोहब्बत तो नहीं बल्कि जिस से हुई वो भुलानी है।

ये बात आज की नहीं दोस्तों ये दास्तां कुछ पुरानी है।
ये मेरी दोस्ती की नहीं ये मेरी मोहब्बत की कहानी है।

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