ये हैं कहानियां कुछ मेरी ज़िनदगी की ( 2nd)
नमस्कार , सतश्श्री काल सारेयां नु...
कैसे हैं सब,
मेरी तरह अच्छे ही होंगे ।
आज आपके शर्मा जी एक नयी कहानी के साथ आए हैं।
चलो शुरू करते हैं।
आप सब को पता है लॉकडाउन में सब बंद हो गया लोगो की नौकरी चली गई तो कुछ लोगों के स्कूल , कोचिंग क्लास, कॉलेज ये सब बंद हो गए।
तो इस टाइम में बहुत से लोग खुद को डिप्रेशन में ले जाते हैैं। किसी को जॉब की टेंशन किसी को अपने बिजनेस की टेंशन तो किसी को एग्जाम की टेंशन। बस ऐसी ही एक कहानी मैंने भी देखीं इस लॉकडॉउन में।
बच्चे अकसर एग्जाम के टाइम ज्यादा देर तक पढ़ते हैं
लेट नाइट तक जागते है और सुबह फिर जल्दी उठ जाते हैं। और दीमाग को बिलकुल आराम नहीं देते इस से आपकी बॉडी की सारी प्रक्रियाएं बदल जाती है।

कुछ टाइम बाद वो डिप्रेस्ड हो जाते हैं।
तो ऐसे में उनके मां पापा उनसे बहुत से सवाल पूछते हैं क्या हुआ, बताया क्यों नहीं , बहुत से सवाल पूछते हैं और गुस्सा करते हैं ।

तो मुझे लगता है कि ऐसे टाइम में उनसे ये सब पूछना गुस्सा करना गलत है क्योंकि इस से वो और परेशान हो जाते हैं। ऐसे में उनसे सिर्फ बात करो प्यार से और जिस चीज से उनको परेशानी हो रही है उस चीज से उनके दिमाग को दूर करो। जैसे अगर उनको टेंशन है पढ़ाई की तो उनको कुछ और चीजें करने को कहो उनको हंसाओ कुछ मजेदार गेम खेलो और उनको कुछ कहानियां सुनाओ जिनमें कोई मोटिवेशन हो या ट्रू इवेंट स्टोरी या इमेजिनेशन स्टोरी जिस से कुछ नया सीखने को मिले। बस उनको उस बात से दूर रखो जिसको लेके वो खुद को परेशान कर रहे हो।
ऐसे टाइम में उनके उपर कोई प्रेशर ना डाले ना कोई दवाईंयां या कुछ अपने देसी नुख्शे बिलकुल ना आजमाएं।
दबाइयां सिर्फ शॉर्ट टर्म के लिए काम करती हैं और उनके कुछ ना कुछ साइड इफैक्ट भी होते हैं।
तो अगर आपको भी लगता है कि आपके आसपास कोई ऐसे लोग है जो परेशान हैं तो उनको समझाओ उस बात से दूर ले जाओ ।
और हां एक स्माइल सब प्रॉब्लम का सोल्यूशन है।

तो बस हंसते रहो और अपने आसपास के लोगों को भी हंसाते रहे।
ध्यान रखे अपना मिलते हैं कल कुछ और कहानियों के साथ ।
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