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Showing posts from April, 2021

खुशियों की पुड़िया ..

 ye dukh hmaare sare khushiyon ki pudiya mai bharte chale gye.. ham apne hee ishq ko zindda rakhte rakhte khud hee marte chale gye.. jo jaaye tera dil tod kar unko mohbbat na jtaaya kar.. roj tutna hai tujhe toh tu har roj unhe vapis bulaaya kar.. lekin jo tere liye khud ko bhool raha hai, kam se kam meri jaan use toh na rulaaya kar.. maana ki vo teri mohbbat samjhta nhi, lekin kabhi toh tu use aapni mohbbat samjhaaya kar.. ishq hai tujhe bhi us se ye baat vo bhi jaanta hai.. ruth jaata hai vo tujhse toh kabhi tu bhi use mnaaya kar.. meri jaan tere dil mai hai vo toh darti kyu hai.. befikar hoke use apne dil ki baat btaaya kar.. haan thoda ruthega vo thoda gussa hoga.. maan jaayega vo tu ek baar uske saamne muskuraaya toh kar.. agar nhi maana toh kabhi door thodi na hoga tujhse.. kabhi toh pyaar se tu bhi use vapis bulaaya kar.. jo cheej tujhe na pasand hai vo chod deta hai na us cheej ko.. kabhi toh tu bhi uski feeling jaan jaaya kar.. use malooom toh hai ki tere dil mai sirf vo h...

गजब की पहेली है ये ज़िन्दगी ...

kabhi suljhaati hai toh kabhi uljhaa jaati hai... kabhi jagaati hai toh kabhi sullaa jaati hai.. kabhi sapno se milaati hai toh kabhi apnno se door le jaati hai.. kabhi ruth jaati hai mohbbat se toh kabhi ishq se mnaati hai... gajaab ki paheli hai ye zindagi kabhi hansaati hai toh kabhi rulaati hai. .   aaj mujhe ulljhaa diya isne ek mohbbat ke kisse mai.. maine bhi khuda se bo maang liya jo kabhi thaa he nhi mere hisse mai.. usko mnaana or samjhaana ab mere bas ki baat nhi hai.. AE - zindgi ab kaise bhi mnaana matt mujhe rutha hoon jis se mai..    ihsq ko khuda maana maine magar mai apni mohbbat ka kaatil nhi.. jis jis se ishq kiya maine sabne seekha diya mujhe ki mai ishq ke kaabil nhi..   khud se door kar diya maine use, tu ise meri azzzadi na samjh... mohbbat mai pagal ho gya hoon mai magar tu ise meri barbaadi na samjh.. ye ishq mohbbat pyaar tu kabhi nhi samjh sakti ye toh sirf shayar hee samjh sakta hai.. lekin  mai shayar nhi hoon magar tu ye meri ...

साइकिल वाली लड़की से इश्क़💗

ना जाने कैसे  इतने दिनों बाद ये दिल यूँ ही खो गया।  उस साइकिल वाली लड़की से  शायर को इश्क़ हो गया। ढूंढने निकला था मैं सुकून उन गलियों की राहों में, मगर इश्क़ मिल गया मुझे किसी की बाँहों में।  मैं तो बस उसकी आंखें ही  देखना चाहता था , मगर उसने धुप को बुला लिया उस ठंडी छाँव में।    वो उसकी खूबसूरत आंखें और उसके थोड़े लाल गाल , वो चेहरे पर लगाया हुआ N 95 मास्क और बांधे हुए बाल, वो ब्लैक टॉप और ब्लू जीन्स के  साथ कतेही ज़हर लग रही थी।    मैंने शायद पहले भी  देखा है उसको वो अपने शैरी से बहुत प्यार करती है।  मैं रोज नहीं मिलता उस से मगर वो रोज मेरा इंतज़ार करती है।  बात न शायद वो करेगी न कभी मैं कर पाऊंगा , मगर बिना बात किये भी वो अपनी आँखों से इज़हार करती है।   पहले तो मैं  बेवजह गलियों में घूमता था मगर अब सिर्फ उसको देखने जाता हूँ , पहले तो मैं सिर्फ कहानियां ढूंढता था मगर अब कहानी के हीरो को देखने जाता हूँ।    खुआवों में नहीं वो मेरी नींदों में आती है।  कभी शैरी के साथ तो कभी साइकिल चलाती  है, इश्क़...

इश्क़ है मेरी जान यूँ भूल मत्त जाना........

आदत उसे भी है हमारी हम इस बात से इनकार नहीं करते , वो इश्क़ करते हैं अपनी यादों से मगर हम उनकी यादों से प्यार नहीं  करते, क्या करें ये शर्मा जी शायर ही बड़े बत्तमीज हैं, मोहब्ब्बत तो जानी से बेइन्तिहाँ करते हैं मगर अपनी मोहब्ब्बत का  इज़हार नहीं करते।  यूँ तो इश्क़ शायरों को कहीं भी हो जाता है , मगर एक तुम्हारा ही हुसन है जिसका हम इंतज़ार नहीं करते। तुम्हे महफिलों में बहुत बदनाम कर लिया मेरी जान , एक ही तो जानी है हमारी फिर भी   हम उस पर ऐतबार नहीं  करते।    आदत उसे भी है हमारी हम इस बात से इनकार नहीं करते , मोहब्ब्बत तो जानी से बेइन्तिहाँ करते हैं मगर अपनी मोहब्ब्बत  इज़हार नहीं करते।  बातें नहीं मेरी जान हम तोह सिर्फ तुमसे  मोहब्बत मांगते   हैं , तुम्हारा गुस्सा   कितना मीठा है ये तो सिर्फ हम ही जानते हैं।  छोटी छोटी बात तुम कितना दिल पे लेती हो इस से हमको फरक नहीं पड़ता, तुम किस चीज से जल्दी मानती हो हम तोह बस उसी चीज को  पहचानते हैं।  ये इश्क़  है मेरी जान ये  हर किसी से नहीं होता , हम बत्तमीज हैं मगर...

बादियों से इश्क़

आये थे जहाँ अपने इश्क़ को भुलाने आज  उन्ही बादियों से हम इश्क़ कर बैठे.. यहाँ दूर दूर तक कोई अपना नहीं दिख रहा ये करोना में हम कौन सा रिस्क ले बैठे..   जरुरत नहीं थी यूँ चुप चाप अपनों को  अकेला छोड़ के घर से दूर जाने की , जिसको मोहब्बत का  पता ही नहीं जरुरत नहीं थी उसको मोहब्बत समझाने की, वो न निभाती तो चल जाता मगर तुझे तो दिल से निभानी थी , क्या जरुरत थी किसी अनजान के लिए उत्तराखण्ड की बादियों में आने की।    उसे बेवफ़ाओं से बहुत  प्यार है जनाब  वो कैसे तेरे इश्क़ को समझ पाएगी, जो तेरी फीलिंग को किसी और से कम्पेयर करे वो क्यों तेरे लिए किसी को  भुलायेगी, तूने ही उसे अपनी आदत बनाया था  तभी तो उसने तेरे को इतना तडफाया , तु भी  झूठा इश्क़ कर लेता फिर उसकी इतनी औकात नहीं कि वो तेरे को रुलाएगी।    बादियों में तो आ गए मगर इश्क़ के बिना यहाँ सब खंडर लग रहा है, इस अस्पताल में भीड़ तो बहुत है जनाब फिर भी यहां  सब बंजर लग रहा  है , दोस्ती भी छोड़  बैठे और इश्क़ भी छोड़ बैठे , किसी के साथ दिल जोड़ कर अपना ही दिल तोड़ बैठ...

उसकी आंखों से मोहब्बत 💝

घूम रहा था मैं गलियों में ऐसा लगा की कोई कहानी मिल गई । जानी के लिए छोड़ दिया था मैने जिस लड़की को गली में आज वो लड़की वानी मिल गई। मैं पैदल घूम रहा था पार्क में और वो साइकिल पर घूम रही थी। जब भी वो मेरे पास से गुजरती उसकी आंखें मेरी आंखें चूम रही थी। एक घंटे में हजार चक्कर लगा लिए उसने मेरे बगल से, मगर एक बार भी बात तक नहीं की। मैने मुड़ के देखा उसकी आंखों को तब भी वो मेरे सवालों का जवाब तक नही दी। गुस्से में आके मैंने उसकी साइकिल को रोक लिया, क्या हुआ वो बोली भी सिर्फ हाथों से मुझे इशारा किया। मैने बोला क्यों इतने चक्कर लगा रही हो बात नही करनी क्या? वो बोली : शायर जी आप शायर तो रहे नही, लिखना तो आपने छोड़ दिया फिर क्यों बात करनी है। मैने बोला : ऐसा कुछ नही है थोड़ा बिजी था इसलिए नही लिख पाया तो सोचा आज किसी की आंखों से ही शुरुआत करनी है। वो बोली : पक्का लिखोगे ना, मैने बोला: हां। वो बोली : शायर जी आज इतने दिनो बाद हमारी गलियों में कैसे आना हुआ। जानी ने बात नही की या किसी और की आंखों में जाना हुआ। मैंने बोला : जानी तो बिजी है अभी अपनी लाइफ के किसी काम मैं, मैं तो बस अपनी कलम लेके उतरा...