इश्क़ है मेरी जान यूँ भूल मत्त जाना........
आदत उसे भी है हमारी हम इस बात से इनकार नहीं करते ,
वो इश्क़ करते हैं अपनी यादों से मगर हम उनकी यादों से प्यार नहीं करते,
क्या करें ये शर्मा जी शायर ही बड़े बत्तमीज हैं,
मोहब्ब्बत तो जानी से बेइन्तिहाँ करते हैं मगर अपनी मोहब्ब्बत का इज़हार नहीं करते।
यूँ तो इश्क़ शायरों को कहीं भी हो जाता है ,
मगर एक तुम्हारा ही हुसन है जिसका हम इंतज़ार नहीं करते।
तुम्हे महफिलों में बहुत बदनाम कर लिया मेरी जान ,
एक ही तो जानी है हमारी फिर भी हम उस पर ऐतबार नहीं करते।
आदत उसे भी है हमारी हम इस बात से इनकार नहीं करते ,
मोहब्ब्बत तो जानी से बेइन्तिहाँ करते हैं मगर अपनी मोहब्ब्बत इज़हार नहीं करते।
बातें नहीं मेरी जान हम तोह सिर्फ तुमसे मोहब्बत मांगते हैं ,
तुम्हारा गुस्सा कितना मीठा है ये तो सिर्फ हम ही जानते हैं।
छोटी छोटी बात तुम कितना दिल पे लेती हो इस से हमको फरक नहीं पड़ता,
तुम किस चीज से जल्दी मानती हो हम तोह बस उसी चीज को पहचानते हैं।
ये इश्क़ है मेरी जान ये हर किसी से नहीं होता ,
हम बत्तमीज हैं मगर इश्क़ को खुदा मानते हैं।
सब लड़के एक जैसे ही होते हैं ये कैसे कह दिया तुमने ,
हम तोह तुम्हे खुद से भी बेहतर मानते हैं।
हमारे यूँ दूर जाने से तुम्हे कोई फरक न पड़े ,
हमारी मोहब्बत हमेशा ऐसी ही रहे,खुदा से बस ये ही दुआ मांगते हैं।
दूर हैं तुमसे मगर दिल में नशे की तरह चढ़े मिलेंगे ,
वापिस आये अगर लौट के तो तुम्हारी गलियों में खड़े मिलेंगे ,
अगर यहां नहीं मिले तो भूल मत जाना हम जन्नंत के परे मिलेंगे ,
अगर जंग हुई मोहब्बत की तो मैदान में तुम्हारे नाम से लड़े मिलेंगे।
और हाँ आँख से एक भी क़तरा आँसु का मत बहाना ,
जब तुम्हारी ही बाहों में हम मरे मिलेंगे।
👌👌👌👌
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