वजह कोरोना ही तो है...
कुछ इंसान व्यस्त थे अपनी ज़िन्दगी के क़ारोबार में, तो कुछ इंसान खो गए थे पैसों के बाज़ार में, फिकर तो सबको थी अपने परिवार की, मगर एक दूसरे से बात करने का समय नहीं था इनके परिवार में, लेकिन खुदा ने सबको मिला ही दिया इस कोरोना के अत्याचार में। वजह कोरोना ही तो है जो हमें अपनों के साथ जीना सीखा रहा, जो हमे परिवार की एहमियत बता रहा, हम तो बस अपने लिए ही जीया करते थे, मगर इस महामारी में एक इंसान ही तो दूसरे इंसान के काम आ रहा। दूध से लेकर अखबार के घर आने तक, करियाने का सामान किचन में पहुँचाने तक, इंसान ही तो है जो सबका हाथ बंटा रहा। गली गली में फल और सब्जी से लेकर, होम आइसोलेशन के लोगों के खाने तक। कोविड सेंटरों में इंजेक्शन से लेकर मरीजों को अस्पताल ले जाने तक। इंसान ही तो है जो अपनी गाडी से सही समय पर हमे लेने आ रहा। प्लाज्मा डोनर्स से लेकर घर घर जाके टेस्टिंग करवाने तक, गरीबों को भोजन से लेकर मरीज़ों को बेड दिलवाने तक, एयरलिफ्ट से ऑक्सीजन से लेकर ट्रेन में कोविड सेंटर बनाने तक, डॉक्टर्स के इलाज़ से लेकर हेल्थ वर्कर के पैमाने तक।...