मोहब्बत भुलाई नहीं जाती....
मैं दिल तो लगा सकता हूँ तुमसे मगर दिल से मोहब्बत अब मुझसे निभाई नहीं जाती,
मैं अपने सारे किस्से भी बता दूंगा तुम्हें मगर आँखों की मोहब्बत मुझसे बताई नहीं जाती,
तेरे रोने की वजह में तेरे आंसूओं में ढूंढ सकता हूँ,
और
तेरे होंठो से तेरे चुप होने की वजह भी मैं पूछ सकता हूं,
रही बात मोहब्बत की तो तुम मुझे कैसे भी मोहब्बत जता सकती हो मगर लफ्ज़ो से मोहब्बत अब मुझसे जतायी नहीं जाती,
और वैसे भी मेरी मोहब्बत तो कोई और थी और वो कोई और मुझसे भुलायी नहीं जाती।
तू मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अपने साथ कहीं भी ले जा सकती है,
मगर मेरी उँगलियों से तेरी कलाई पकड़ी नहीं जा सकती।
तू मूझे बस में या कार में अपनी बगल बाली सीट पर बिठा सकती है,
मगर मेरी बाइक तुझे पीछे वाली सीट पर नहीं बिठा सकती।
और भी बहुत से किस्से और कहानियाँ हैं जो मुझसे बताई नहीं जाती।
मेरी मोहब्बत कोई और थी और वो कोई और मुझसे भुलाई नहीं जाती।
तु चाहती है कि मैं तेरे साथ बैठ के खाना खाऊं तो मैं खाना खाऊंगा।
मगर तु चाहती है कि मैं तुझे अपने हाथों से खाना खिलाऊँ तो मैं नहीं खिला सकता।
तु चाहती है कि मैं तेरे साथ पिक्चर देखने जाऊं तो मैं तेरे साथ जाऊँगा।
मगर तु चाहती है कि मैं तेरे करीब आकर तुझे चाहूँ तो वो फील मैं नहीं जगा सकता।
तेरे साथ भी रह सकता हूँ तुझे खुश भी रख सकता हूँ
मगर मोहब्बत मुझसे निभाई नहीं जाएगी।
तुझे पता है मेरी मोहब्बत कोई और है और वो कोई और मुझसे भुलाई नहीं जाएगी।
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