कोई याद नहीं करता🥺.....

मैं वो इंसान हूँ  जिसे अब कोई याद नहीं करता,

मतलब के लिए इश्क़ तो सब करते थे मुझसे,

मगर उसके जाने के बाद इश्क़ की मुझसे कोई बात नहीं करता।


एक सफर से गुजर रहा था मैं जिसे लोग अक्सर तन्हाइयों का सफर कहते हैं।

मैं अकेला नहीं था सफर में एक कलम और कुछ पन्ने जो हमेशा मेरे साथ रहते हैं।


बैठा था मैं सुकून से एक अपनी अलग ही दुनियां में।


उसी अलग दुनियां में मेरी उस से मुलाक़ात हुई थी,

उसकी आँखों में बहुत सुकून था यार जब उसकी आँखों से मेरी बात हुई थी।

थोड़ी देर के लिए तो दिल मेरा काबू था,

पता नहीं उसकी चेहरे पर कौन सा जादू था।


अचानक से पता नहीं क्यों मेरी कहानी का मोड़ सैड एंडिंग से एक दम रोमेंटीक एन्ड कैसे हो गया।

ना कोई मुलाक़ात ना कोई जस्बात फिर मैं लिखता लिखता उसकी बातों में कैसे खो गया।

जब पढ़ा मैंने  तो उसे पढ़ने के बाद वो मेरे हर कहानी हर किस्से में पहुँच गई।

थोड़ी सी मोहब्बत हो गई उस से क्योंकि वो मेरे दिल के हर एक हिस्से में पहुँच गई।


वो मूझे मेरी एक अलग ही दुनिया मे जो मिली थी,

उसके चेहरे पर अलग ही मुस्कान थी,

उसको देख कर मूझे अलग ही खुशी मिली थी।

सोचा कि अब जख्म भरने लगे हैं मेरे दिल के,

तभी तो खुदा ने मेरे लिए ये कहानी लिखी थी।

मेरे दोस्त बहुत थे कुछ दोस्त कॉलेज तक थे तो कुछ गलियों तक,

मगर शहर में रहने के लिए वो ही एक वजह मिली थी।

सब जानते थे आज कल की मोहब्बत महज एक बहाना है,

मगर मेरे लिए वो मोहबत एक गज्जब मिली थी।

उसका दिल टुटा था मगर मैने कोशिश की थी उसे जोड़ने की,

उसके हर एक अल्फाज़् को उसके दिल के हर एक पन्ने खोलने की।

बताया भी था उसे और अच्छे से समझाया भी था उसे।

शायर के इश्क़ में बदनाम हो जाओगी अगर दिल लगाओगी उसके लफ्ज़ो से,

मगर उसने कहा था मैं रोज़ पढ़ना चाहूँगी अब तो दिल लग गया है इन शब्दों से।


मैं रोज़ लिखने लग गया मोहब्बत के किस्से कोरे पन्नों पर,

और वो पढ़ कर रोज़ मलहम लगाती रही मेरे ज़ख्मो पर।

रोज उसके चेहरे पर ख़ुशी देखना मेरा एक खुआव हुआ करता था,

उसकी आँखों में मेरे हर एक सवाल का जवाब हुआ करता था।


वो दिल की बातें जुबान पर कभी लाती नहीं थी,

और अपनी आंखें मुझसे कभी छुपाती नहीं थी।


उसकी आँखों को देखने की आदत मुझे खराब लग गई ।

सारे नशे छोड़ दिए मैंने मेरे लिए तो वो शराब लग गई।

हर सवाल का जवाब मिल जाता था उसकी आखें देख कर।

कितना भी गुस्सा क्यूँ ना हो जाऊं मगर पिघल जाता था उसकी एक स्माइल देख कर।


उसका इश्क़ मेरे सर पर इस कदर छाया था जैसे बारिश की बूंदो के पहले आसमान में बादल होता था,

उसे मालूम था मेरी मोहब्बत कैसी थी किस क़दर् में उसके लिए पागल होता था।

एक दिन अचानक मेरी मोहब्बत पर अँधेरा छा गया उस दिन वो वापिस आ गया,

जिसके छोड़ जाने के बाद ही उसने मुझे अपने दिल में रखा था।

मेरी गलतियां और मेरी खामियां नज़र आई उसे शायद वो मुझे से काफी ज्यादा अच्छा था।


मैंने पाया भी नहीं था उसे फिर भी उसे खोना पड़ा,

ना चाहते हुए भी मुझे उस से इतना दूर होना पड़ा।


समय बिताना तो चाहता था मैं उसके साथ मगर बिता ना सका,

मोहब्बत तो बेशुमार हुई उससे मगर अच्छे से निभा ना सका,

चाहते तो थे कि हमेशा साथ रहे उसके मगर ये बात हमारा दिल उसे समझा ना सका।


वो मोहब्बत भी बड़ी अजीब थी।

जो मेरे दिल के इतने करीब थी।

चाहते तो बहुत थे वो हमें,

शायद मेरी मोहब्बत ना उसके लिए अजीज थी 

और ना वो मेरा नसीब थी।

उसने भी चाहा था हमें, और हम भी चाहते थे उसे ये बात खुअवो की बस एक लकीर थी।


मेरे लिए तो उसकी आवाज ही सब कुछ थी मगर वो बोली ही बहुत कम मुझसे,

उसकी चुपी से ही महसूस हुआ मुझे एक दिन जीत जाएगा उसका गम मुझसे।


आज वो दूर है मुझसे अगर मैं उसके पास गया भी तो भी वो कभी मेरे पास नहीं आएगी,

वो मेरी मोहब्बत है ये मेरी मोहब्बत मुझे कभी अहसास नहीं दिलाएगी।


वो तो भूल गई मूझे उसका दिल अब मेरी कोई बात नहीं करता।

हाँ , मैं वो इंसान हूँ जिसे अब कोई याद नहीं करता।


Comments

Popular posts from this blog

MIRACLE VS REALITY

दुआ करना वापिस सबसे मिल सकूँ ....

तुम्हारी याद ?