कैसे यकीन दिलाऊं
तुमको कैसे यकीन दिलाऊं अब वो सब कुछ छोड़ दिया है मैंने। याद है मुझे तुम कितना मरती थी मुझपर। और मैं कमीना हर बार शक करता था तुम पर। कैसी मोहब्बत थी मेरी हर पल लड़ाई होती थी। उन बातों को भूल जाता था जो तुमने समझाई होती थी। बहुत कुछ सीखाती थी तुम जब मेरे साथ होती थी। मुझे मालूम नहीं था यार जहां मोहब्बत होती है वहां विश्वास भी होना चाहिए। इसी विश्वास के लिए हर बार तुमसे लड़ाई होती थी। तुमको गालियां देकर तुम्हारे दिल का विश्वास सब तोड़ दिया था मैंने। कैसे यकीन दिलाऊं तुमको अब वो सब कुछ छोड़ दिया है मैंने। और जो शक करने का घर था ना वो भी तोड़ दिया है मैंने। याद है मुझे मैंने बहुत दिल दुखाया है तुम्हारा। आज भी रोता हुआ चेहरा सामने आता है तुम्हारा। कभी भी मैंने तुमको और तुम्हारे दिल को खुश नहीं रखा। इतना समझाया तुमने लेकिन मैंने फिर भी खुद को नशे में बर्बाद रखा। हां मानता हुं तरीके गलत थे मेरे लेकिन मोहब्बत सच्ची की थी मैंने। कैसे यकीन दिलाऊं तुमको अब वो सब कुछ छोड़ दिया है मैंने। और जो नशे के स्टॉक थे उनको भी हमेशा के लिए फोड़ दिया है मैंने। वो लम्हें शुरू मोहब्बत से होते ...