तुमसे बहुत कुछ कहना है।

तुमसे बहुत कुछ कहना है यार पर मैं कुछ भी कह नहीं पाता।
सोचता तो हुं कि तुमको कुछ ना बताऊं पर क्या करूं तुमसे कुछ छिपा नहीं पाता।
तुमसे पूछना कुछ और होता है मै कुछ और ही पूछता रहता हुं।
जिस जवाब को जानने के लिए तुम्हारा इतना इन्तज़ार रहता है वो सवाल मैं तुमसे पूछ ही नहीं पाता।
कहना तो बहुत कुछ है तुमसे पर मैं कुछ भी कह नहीं पाता।
समझ नहीं आता यार मैं तुमसे क्यों मिलने चला गया।
अब तुमसे दूर जाने का भी सोच लूं तो भी दिल दूर नहीं जा पाता।
हर पल तुमको ही याद करता रहता है बिना किसी वजह के।
खुद को तो बहुत समझाने की कोशिश करता हुं पर दिल को मैं कभी समझा नहीं पाता।
बहुत कुछ बताना है तुम्हे पर मैं कुछ भी बता नहीं पाता।

अकेले कमरे में बंद करके झूठी बातों से खुद को हंसाने की कोशिश करता हूं।
इतना दुख नहीं होता कि तुम मेरे पास नहीं हो पर तुमको अपनी मोहब्बत का ऐहसास दिलाने की कोशिश करता हुं।
बस इन्तज़ार करता रहता हुं तुमसे बात करने का लेकिन खुद को हर रोज रुला नहीं पाता।
कभी कभी मुस्कुरा लेता हुं तुम्हारी पुरानी बातों को याद करके लेकिन रोज रोज तेरे बिना खुद को हंसा भी नहीं पाता।
चाहता तो हुं तुमको बहुत कुछ बताना पर मैं कुछ भी बता नहीं पाता।

धड़कती रहती है सांसें ना जाने ये कब रुकेंगी।
उस दिन का ही इन्तज़ार है जब आंखें तेरे सामने झुकेंगी।
थोड़े पल के लिए तो समझ लेता हुं तुमको लेकिन तेरे दिल को कभी समझ नहीं पाता।
मन तो करता है हाथ पकड़ कर तुझे पूरा शहर घुमाऊं लेकिन सपने में भी ये ख्याल कभी पूरा नहीं हो पाता।
अब तो आदत ही हो गई तुम्हारी इस आदत को कोई छुड़वा भी नहीं पाता।
मिटाना तो मैं भी चाहता हुं तेरे खयालों को अपने दिमाग से।
लेकिन दिमाग को कैसे समझाऊंगा मैं तो दिल को भी समझा नहीं पाता।
कहना तो बहुत कुछ है तुमसे लेकिन मैं कुछ भी कह नहीं पाता।

तुमसे बहुत कुछ कहना है पर कैसे कहूं।
रातों को रोज तुमसे बात करने का दिल करता है पर कैसे करूं।
शायद तुझे ये सब बकवास लगता होगा कि मैं तुमको हर पल याद करता हुं।
तुझे याद करते करते मैं खुद को भूल गया अब तु ही बता मैं कैसे रहूं।
कहना तो है तुमसे पर कैसे कहूं।

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