उसकी आंखों से मोहब्बत 💝
घूम रहा था मैं गलियों में ऐसा लगा की कोई कहानी मिल गई ।
जानी के लिए छोड़ दिया था मैने जिस लड़की को गली में आज वो लड़की वानी मिल गई।
मैं पैदल घूम रहा था पार्क में और वो साइकिल पर घूम रही थी।
जब भी वो मेरे पास से गुजरती उसकी आंखें मेरी आंखें चूम रही थी।
एक घंटे में हजार चक्कर लगा लिए उसने मेरे बगल से, मगर एक बार भी बात तक नहीं की।
मैने मुड़ के देखा उसकी आंखों को तब भी वो मेरे सवालों का जवाब तक नही दी।
गुस्से में आके मैंने उसकी साइकिल को रोक लिया,
क्या हुआ वो बोली भी सिर्फ हाथों से मुझे इशारा किया।
मैने बोला क्यों इतने चक्कर लगा रही हो बात नही करनी क्या?
वो बोली : शायर जी आप शायर तो रहे नही, लिखना तो आपने छोड़ दिया फिर क्यों बात करनी है।
मैने बोला : ऐसा कुछ नही है थोड़ा बिजी था इसलिए नही लिख पाया तो सोचा आज किसी की आंखों से ही शुरुआत करनी है।
वो बोली : पक्का लिखोगे ना,
मैने बोला: हां।
वो बोली : शायर जी आज इतने दिनो बाद हमारी गलियों में कैसे आना हुआ।
जानी ने बात नही की या किसी और की आंखों में जाना हुआ।
मैंने बोला : जानी तो बिजी है अभी अपनी लाइफ के किसी काम मैं,
मैं तो बस अपनी कलम लेके उतरा था मैदान में।
वो बोली: रोज शायर की गलियों में घूमती हूं मैं,
शायर की कलम के नए किस्से ढूंढती हूं मैं,
आपने लिखना छोड़ दिया था इसलिए थोड़ा नाराज थी,
नही तो रोज आपकी आंखों को चूमती हूं मैं।
मैने बोला : गलियों में तब घूमा करो जब अपने दिल की बात बता पाओ।
और मोहब्बत तब करो जब उसको निभा पाओ।
रोज मेरी आंखें चूम के चली जाती हो,
चूमा तब करो जब हर पल मेरी आंखें में बीता पाओ।
वो बोली : शायर जी मेरे घर के सामने से अगर जाओ तो मुझे ढूंढ भी लिया करो।
और मैं गार्डन में थोड़ी ना बैठी रहती हूं कभी कभी अपनी आंखे छत पर भी घूमा लिया करो।
मैने बोला : पागल नहीं होना मुझे तुम्हारी आंखें पहले ही इतना पागल कर चुकी हैं।
हां अगर स्माइल करोगे तो देख लूंगा तुम्हारी मुस्कान को देखने के लिए मेरी आंखें कब से तरस चुकी हैं।
वो बोली : शायर जी गलियों में घूमने आओ तो अकेले आया करो ना, आपके ताया जी को देख के हम मुस्कुराएंगे कैसे।
हम पापा और शेरी के साथ खेल के मुस्कुरा लेंगे आप चुप के से देख लेना ये आइडिया सही है वैसे🤔
मैने बोला : बस कुछ ही दिन और हैं तुम्हारी गलियों में,
फिर किस्से ही रह जाएंगे फूल की कलियों में।
वो बोली : आधे रास्ते पर छोड़ के कहां जा रहे हो शायर जी,
माना की हम मोहब्बत नहीं करते,
आपकी आंखें नहीं पढ़ते,
और आपसे बातें भी नहीं करते,
लेकिन आप इन आंखों को छोड़ के कहां जा रहे हो।
मैने बोला : तुम्हारे शहर की गलियों में अब मजा नहीं आता,
तुम्हारी आंखों से तो मोहब्बत करते ही हैं हम मगर किसी से बात किए बिना रहा नही जाता,
ये मोहब्बत में चांद तारे तो अपने बजट में नहीं आते,
मगर कभी फुर्सत मिले तुम्हे तो चलना तुम्हे हिमाचल घूमा के लाते।
वो बोली : इतने दूर जाओगे तो हमे भूल जाओगे।
कुछ दिन के लिए ही जाना और बता देना वापिस कब आओगे।
मैने बोला : मेरी कलम ने मुझसे कहा है।
की तुम्हारी आंखें जी भर के देख लेना मगर तुमसे दिल की बात मत करवाना।
मोहब्बत तेरी चाहे इसी शहर में क्यों न रहे मगर तु वापिस इस शहर में कभी मत आना।
वो बोली : इसका मतलब जाते जाते आप इन गलियों के साथ साथ जानी को भी रुलाएंगे।
हमारे लिए तो नहीं आओगे मगर क्या जानी से मिलने के लिय भी आप नहीं आयेंगे।
मैं उसको कुछ बोल पाता इतने में मेरी आंख खुल गई।
टाइम देखा तो रात के दो बज रह हैं।
क्या करें लिखने लग जाऊं तो ये लोग परेशान हो जाते हैं।
ना लिखूं तो मेरे ये जस्बात मुझे बहत रुलाते हैं।
👌👌
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