चाय! चाय! चाय!

करता हुं जीकर उसका कुछ अपने ही अंदाज में।
वो जब फैलाती है खुशबू महक आ जाती है उसके स्वाद में।
कोई नहीं रोकता इसको ये बिना रुके ही सबके दिलों में चलती जाए।
आग पे उपर रखी हुई जब ये उबाल लेती है तो सीधी होंठों तक पहुंच जाए।

उसको कहते है जनाब हम चाय! चाय ! चाय!

हर कहीं हर टपरी पे इससे मिलान होता है।
ना चाहते हुए भी इसको चखना आसान होता है।
वैसे तो है ये भी एक नशा मेरे यारो।
पर इसकी खुशबू में डूबने वाला भी महान होता है।

जितनी भी बातें है इस दुनिया की ये सब सुनती है।
चूल्हे पे जब ये उबलती है तो सबकी आंखों में एक खुआब बुनती है।
अपने🚬 छोटे से दोस्त को हमेशा साथ रखती है
साथ में दोनों जब धुएं में महकते हैं तो बड़े बड़े लोगो की भी आंखें खुलती हैं।

मिल जाएगी आपको ये हर एक गली हर एक मोड़ पर।
एक बार चख के देखना जनाब सब आ जाओगे दारू छोड़ कर।
ये तो हर महफ़िल में चार चांद लगाती है।
फिर चाहे कोई भी मीटिंग हो कोई नहीं जाता इसको अधूरा छोड़ कर।

बच्चों से लेकर दादा तक और मां से लेकर पापा तक।
हर कोई नए नए स्वाद से पीता है।
सिगरेट पीने वाला भी खाने से नहीं सिर्फ इसी चाय से जीता है।
ये सरकार तो नशे की सारी चीजें खुलवा रही है।
जनाब ये भी एक नशा है इसको भी खुलवा दो इसकी बहुत याद आ रही है।


Comments

  1. Aap peete ho kya☕
    Nii na.
    Fir itna deeply kaise ✍️diya
    😦

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