वो ही इंसान मिला था क्या दिल लगाने को 💔
जब आंखें मिली थी उस से तो बस हाथ मिलाना ही काफी था।
खुशी के मौके पर थोड़ी सी खुशी और दे गया वो,
इसका मतलब ये नहीं कि उस से दिल लगाना ही बाकी था।।
जब जानते नहीं थे एक दूजे को तो सिर्फ जान पहचान बढ़ाना ही काफी था।
मिले नहीं इतने कभी, बस एक दो मुलाकातें तो हुई थी,
इसका मतलब ये तो नहीं कि उसको अपनी मोहब्बत बनाना ही बाकी था।।
पता है जानी मुझे खुशी मिलती है आपको दूसरों को खुश करके,
मगर उसका ही दिल मिला था क्या खुश करवाने को।।
दुनिया इतनी भी छोटी नहीं है जनाब वो ही बंदा मिला था क्या दिल लगाने को।
तुम्हे आदत हो गई उसकी बातों की,
उसे आदत हो गई तुम्हारी आंखों की,
इस आदत को छोड़ना तो दूर तुम तोड़ना भी नहीं चाहते थे।
फिर कौन आ गया तुम्हारी मोहब्बत के चांद पर दाग लगाने को।
जिसे तुम्हारी ना होने से कोई फर्क नहीं पड़ता, क्या वो ही इंसान मिला था दिल लगाने को।।
तुम्हारा दिल ही पागल था जो उसे सब बात बताया करता था।
और वो बंदा ही गलत था जो तुमसे हर बात छिपाया करता था।
मैंने ये नहीं कहा कि उसने कभी तुमको खुश नहीं रखा,
मगर थोड़ी सी खुशी देकर वो कितना रुलाया करता था।
तुमसे मिलने के लिए वो बार बार क्यों आया करता था।
ऐसी कौन सी बातें थी जो घर के हॉल में बैठ के नहीं हो पाती,
वो तुम्हे चार दिवारी के अंदर क्यों ले जाया करता था।
वो कहता था मेरी फैमिली कभी मुझे सपोर्ट नहीं करती।
तुम्हारा दिल उसके लिए खुदा से हर दु आएं मांगा करता था।
खुआइशैं तो सारी पूरी हो गई,
मगर वो तितलियों की तरह हर फ़ूल पर क्यों बैठ जाया करता था।
पता है जानी मुझे खुशी मिलती है आपको दूसरों को खुश करके,
मगर उसका ही दिल मिला था क्या खुश करवाने को।।
दुनिया इतनी भी छोटी नहीं है जनाब वो ही बंदा मिला था क्या दिल लगाने को।
बात जब दिल की थी तो गलत इंसान पर भरोसा क्यों किया।
जब पता था जानी कि फैमिली मानेगी नहीं तो उस से इश्क ही क्यों किया।
जो भी था, जैसा भी था, छोड़ के चला गया ना, फिर बार बार क्यों याद करते हो उस बेवफा जमाने को।
जो दिल के हजार टुकड़े करके गया है, क्या वो ही बंदा मिला था दिल लगाने को।
🙁🙁😦
ReplyDeleteइतनी बार हारे हो मोहब्बत में,
ReplyDeleteफिर भी मोहब्बत में मरने चले जाते हो।
जब पता है तुम्हे कि ये दुनिया मतलबी है,
फिर भी मतलबियों से मोहब्बत करके आते हो।