मां बाप से बढ़कर इस दुनिया में कोई भी नहीं है💙💙

 आज ऐसे ही बैठा था मै तो न्यूज पेपर पढ़ने लगा ताया जी बोले कि सुबह सुबह नेगटिव न्यूज ना पढ़ा करो,

अब उनका नजरिया और उनकी सोच थोड़ी अलग थी, उनको लगता है कि नेगेटिव न्यूज पढ़ के नेगटिव एनर्जी मिलेगी,

लेकिन वो तो डिपेंड करता है ना पढ़ने वाले पे वो उस न्यूज को पॉसटिव वे से देखेगा या नेगेटिव से,

अगर इंसान उस न्यूज में भी अपनी थिंकिंग पोस्स्टिव रख रहा है तो वो पढ़ सकता है न्यूज ।


उस न्यूज की तरह अपनी भी ज़िन्दगी है अब वो डिपेंड करता है कि इंसान उस नेगेटिव न्यूज में कितना पॉस्स्टिव वाइब ढूंढता है,


बात आ गई है तो आज कल न्यूज क्या आती है 



"मां ने बेटी से मोबाइल छीना और बेटी ने चार्जर हाथ में पकड़ के पंखे से फांसी लगा ली"

एक टुच्ची सी चीज के लिए इन्होने अपनी जान कुर्बान कर दी।

इसका मतलब की मोबाइल इंसान की जान से महंगा हो गया।

कुछ दिन पहले न्यूज थी कि एक स्कूल की लड़की ने अपने आशिक़ के साथ ( अब स्कूल की लड़की है तो आशिक़ ही बोलेंगे ना उनको तो साला प्यार का पी नहीं मालूम) उसके साथ मिल के अपने मां बाप को मार दिया।

वजह क्या थी कि वो उस से बात नहीं करने देते थे और मिलने नहीं देते थे,

जिन्होंने उसको इस दुनियां में लाया उसने किसी और के खातिर उनको ही इस दुनिया से हटाया।


वाह ! वाह! ये हैं आज कल के शहर की युवा पीड़ी,


शहर की इसलिए क्योंकि ऐसा माहौल सिर्फ शहर में होता है,

गांव के बच्चो के लिए भगवान भी मां बाप होते हैं,

मगर शहर के बच्चों को जो चीज चाहिए अगर वो किसी ने दिला दी तो उनके लिए वो ही खास होते है।


क्योंकि माहौल ही ऐसा बना है बचपन से,

गांव के बच्चे छोटे होते हैं तो उनके साथ खेलने के लिए पूरा गांव आता जाता रहता है,कभी पढ़ोस वाली चाची, कभी गाड़ी वाले चाचा, कभी सामने वाले घर की दादी, उनसे कोई ना कोई बातें करता रहता है।


मगर शहर के बच्चो के लिए कहा ये सब,

मां बाप दोनों जॉब पे और काम बाली के पास बच्चा , अब वो अपना बच्चा देखे की तुम्हारा ,

शहर के मां बाप अपने बच्चों की खुद आदत बिगाड़ते हैं,

जब छोटा बच्चा खाना नहीं खाता तो उसको लालच देते हैं फोन में वीडियो चलते है, गाना सुनाते हैं, कार्टून दिखाते हैं, फिर जाके खाना खिलाते हैं।जैसे जैसे बड़ा होता है वैसे वैसे बोलते हैं ये भी लेंगे तुझे ये खा ले तु, हां बेटा वो भी ले लेंगे ये खा ले तु।

अब बच्चे को आप खुद बिगाड़ रहे हैं बड़े होकर ये ही बोलेगा मुझे फरारी चाहिए वरना मैं खाना नहीं खाऊंगा।


और अगर गांव में ग़लती से बोल दिया किसी ने कि मुझे ये दो वरना में खाना नहीं खाऊंगा,

तो दो लात मार के बोलते है निकल घर से,अगर गुस्से में निकल भी गए तुम तो रात को तो सोने आओगे ना, तो जब आओगे तो दो लाफे और पढ़ेंगे कि सुबह से कहां थे।

गांव के बच्चों के सपने पूरे होते हैं और शहर के बच्चों को जिद्द,

गांव में नहीं बोलते की तुम ये करो तुमको ये लाके देंगे, वहां तो तुम करो या ना करो वो दो लाफें जरूर देंगे, क्योंकि वो उनका प्यार जताने का तरीका है।

गांव में ये ईगो, अटिट्यूड ,जिद्द ये सब नहीं चलता , वहां प्यार इमोशन और हार्ड वर्क चलता है।

गांव के बच्चे तो मस्ती माहौल में ही सीखते हैं चार पुराने लोग बातें बताते हैं हमारे जमाने में ऐसा हुआ करता था।

लेकिन शहर के लोगों को ये तक नहीं पता होता कि उनके पड़ोस में कौन रहता है।

क्योंकि उनका वैसा एन्वाइरन्मेंट है ही नहीं,

उनको अकेला रूम चाहिए, नो डिस्टरबेंस, उनकी पसंद का खाना चाहिए,

ये बात छोटे बच्चों के लिए नहीं है बड़ों के लिए भी है,

अगर उनको किसी चीज के लिए रोक रहे है टोक रहे हैं तो भाई मां बाप उनके लिए बुरे हो गए।

वो मां बाप को सुना देते हैं चार बातें और मां बाप को सुन ना पढ़ेंगी बचपन में उन्होंने ही तो बिगड़ा है।


अब तुम छोटा सा हाथी का बच्चा छोटे से घर में रख रहे हो, तो जब वो बड़ा होगा तो दरवाजे बड़े करने पढ़ेंगे ना।

गांव में पसंद और ना पसंद नहीं होती अगर हुई भी तो ये ले सब्जी और ये ले मसाला खुद बना ले बेटा।

अब यहां बात संस्कारों की नहीं है यहां बात एन्वाइरन्मेंट की है, माहौल की हैं।


मां बाप तो सबके अच्छे होते हैं, जिनको नहीं लगते अच्छे उनको उनकी एहमियत नहीं पता,

जब उनसे दूर हो जाओगे या खुद मां बाप बनोगे तब एहसास होगा उनका।


कई लोग बोलते हैं मेरे पापा अच्छे हैं लेकिन मां नहीं,

मेरी मां अच्छी है मगर पापा नहीं,

ये आपकी सोच है ऐसी आपको लगता है ऐसा लेकिन ऐसा होता नहीं,

वो दोनो अच्छे हैं तभी तुम यहां हो, अगर उनमें से एक नहीं होता तो तुम यहां होते नहीं,


मां दुनिया की सबसे बड़ी योद्धा होती है सुना होगा सबने क्योंकि वो बच्चे को 9 महीने तक अपने अंदर सुरक्षित रखती है,

तुम लोग 9 मिनट तक अपनी बात नहीं छिपा पाते तुम क्या समझोगे मां बाप को ।

9 महीने तक जो मां सांसें लेती है उस से तुम जिंदा रहते हो, मां हाथ पकड़ कर चलना सिखाती है लेकिन बाप दुनिया तुम्हारे लिए कैसी होगी उसको कैसे देखना है वो बाप नजरिया बताता है दुनिया को देखने का।

बहुत लोग बोलते हैं शहर के मेरे पापा मुझे रोकते है टोकते है, वो सही नहीं है मुझे बिल्कुल अच्छे नहीं लगते,

वो अपना अनुभव बताते हैं कि जो हमने गलतियां की है वो तुम ना करो, 

उन्होंने जो 40 साल में जो देखा है वो तुमने 20 साल में देख लिया क्या, 

नहीं ना,

वो उनका अनुभव है और उनका नजरिया है जो सिर्फ तुम्हारे भले के लिए बताते है।

तुमने अभी दुनिया देखी नहीं तुम एडमिशन लिए हो अभी और वो 20 साल पहले देख के सब करके पासआउट हो चुके हैं,

तो इतना याद रखना अगर मां बाप नहीं होते तो तुम कहीं नहीं होते।





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