शायर से मोहब्बत करके तो देखो💝
जो पढ़ता है आंखों को उनसे नज़रें मिलाकर तो देखो।
बातें तो सब करते हैं जनाब , उन बातों से किसी को हंसा कर तो देखो।
कौन कहता है कि शायर बदनाम कर देता है मोहब्बत को,
कभी शायर से दिल लगाकर तो देखो।
वो अपनी कहानियों से हंसाएगा भी तुमको,
कभी कभी अपने खुआवों में बुलाएगा भी तुमको,
अगर तुम नाराज हो जाओगे तो वो मनाएगा भी तुमको।
जब जब मन होगा उसका तो वो रुलाएगा भी तुमको।।
दिल जोड़ने वाले से तो मोहब्बत हर कोई कर लेता है,
कभी अल्फाजों को जोड़ने वाले से खुद को मोहब्बत करबाके तो देखो।
कौन कहता है कि शायर बदनाम कर देता है मोहब्बत को,
कभी शायर से दिल लगाकर तो देखो।
महफिलों में आशिक़ अपने सनम को लेके मजे लूटने आते हैं।
कई अपनी मोहब्बत को मोहब्बत बनाके मोहब्बत से छूटने आते हैं।
महफिलें भले ही प्यार करने वाले सजाते होंगे,
मगर वो शायर ही हैं जो अपने अल्फाजों से महफिलों में चार चांद लगाते हैं।
जिस्म पर लिखने वाले तो बहुत मिल जाएंगे, कभी दिल पर लिखने वालों से लिखवा कर तो देखो।
कौन कहता है कि शायर बदनाम कर देता है मोहब्बत को,
कभी शायर से दिल लगाकर तो देखो।
मोहब्बत में उनको सिर्फ बदनामियां ही मिलती।
खुआवो में उनके हमेशा कहानियां ही हैं मिलती।
दूसरों की तरह कोशिश नहीं करनी पड़ती उनको जान ने की,
कुछ अल्फाजों में ही व्यां कर देते हैं बातें वो अपने दिल की।।
मिलने की खुआइशैं तो सब करते हैं, कभी उनसे बिना मिले खुआब सजाकर तो देखो।
कौन कहता है कि शायर बदनाम कर देता है मोहब्बत को,
कभी शायर से दिल लगाकर तो देखो।
आज कल की मोहब्बत तो बस जिस्म पर नाम की है,
मगर मैंने शायर से मोहब्बत शारेआम की है।
उसकी मोहब्बत की अहमियत भी देखी है मैंने,
उसकी आंखों की मासूमियत भी देखी है मैंने,
एक एक पल को अल्फाजों के साथ कैद कर देती है,
शायर की कलम भी चीज बड़े काम की है।
डिजिटल दुनिया में लोग बहुत समझाते हैं, मगर शायर की चिट्ठियों से खुद को समझाकर तो देखो।
कौन कहता है कि शायर बदनाम कर देता है मोहब्बत को,
कभी शायर से दिल लगाकर तो देखो।
🙂😯🙁😊😍
ReplyDeleteShayar log kabhi mohbbat nhi nibhate..
ReplyDeleteInko toh bas apni कहानियां likhni होती हैं।।
Great ����
ReplyDelete