betiyaan paalne ki aukaat
सुना है ! बेटियाँ पालने की औकात सबके पास नहीं होती।
जिस पर पड़ती है उपर बाले की नजर बस बेटियां ही उसके साथ होती।
मिटटी की मूरत भगबान नहीं होती आधी रात के बाद कभी शाम नहीं होती।
अगर मूरत भगबान होती तो बेटियां कभी हैबानियत का शिकार नहीं होती।
उसी बकत इन्साफ मिल जाता अगर आधी रात के बाद फिर शाम होती।
बैसे मंनत तो शायद सबकी पूरी होती है ,
जिसके घर न हो बेटी उसकी ज़न्नत अधुरी होती है।
हर तरफ हर जगह वो साथ नहीं होता ,
बेटी नहीं होती तो बेटा कभी बाप नहीं होता,
और
बाप को पकड़ने वाला किसी का हाथ नहीं होता।
#बेटी बचाओ , बेटी पढ़ाओ
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