यारों को सलाम(Salute to friends)
बंदा हुँ मैं सीधा साधा करता न गलत काम,
दिल में बसे हैं मेरे यार करता हुँ उनको सलाम।
वो दर्द से भरा मेरा नसीब था,
आंखें खुली तो वो मेरे करीब था।
आगे पीछे न देखा मैंने लगा थोड़ा अजीब सा,
डर गया था मैं लोगों की बात सुन के।
वो न आता तो पागल हो जाता मैं उस झुण्ड से।
बस वहीँ से शुरू किया मैंने अपना सपना,
देखा था मैंने दुनिया में कोई नहीं होता अपना।
सोचा न था मैंने वो मेरे इतने करीब है,
दोस्ती के बीच दुश्मन बन जाना भी अजीब है।
लफड़े तो पहले भी हुए लेकिन दिल में न कोई सिकवा था।
दोनों के बीच आयी लड़की दोस्ती के बीच न कोई रिस्ता था।
ज़िन्दगी जीने की वजह बन गया मेरा यार
सब कुछ सीखा मैंने सीखा करने उस से प्यार।
लोगो की न सुनी मैंने सपने देखे खुल के
पूरा करने की ना हिमंत दिल की बात बताऊं खुल के।
लिखा था मैंने पहला गाना खुद को मान कर
शौक इतना पाल लिया है मैंने सब कुछ ठान कर।
कोई रोकने वाला न था मुझको मैं चलता एक निशान पर।
हिम्मंत ना है मेरे अंदर खुल के मैं जीया नहीं,
पढने लिखने वाला लोंडा आज तक कुछ खास किया नहीं।
मैं हूँ वो इंसान जो सपने लेता था पैसों से जीने के,
घरवाले भी कहते थे बेटा अच्छा होगा पढ़ लिखने से।
आज तक मुझे कुछ समझ नहीं आया ,
क्या मैंने खोया और क्या मैंने पाया।
सवाल आते है मन में हज़ारों पूछने की कोई वजह नहीं।
समझाने वाले समझातें है हमेशा लेकिन सोचने की कोई वजह नहीं।
ज़िन्दगी जीने के लिए मान नहीं ठान लेना चाहिए।
दिल में बसे हैं मेरे यार करता हुँ उनको सलाम।
वो दर्द से भरा मेरा नसीब था,
आंखें खुली तो वो मेरे करीब था।
आगे पीछे न देखा मैंने लगा थोड़ा अजीब सा,
डर गया था मैं लोगों की बात सुन के।
वो न आता तो पागल हो जाता मैं उस झुण्ड से।
बस वहीँ से शुरू किया मैंने अपना सपना,
देखा था मैंने दुनिया में कोई नहीं होता अपना।
सोचा न था मैंने वो मेरे इतने करीब है,
दोस्ती के बीच दुश्मन बन जाना भी अजीब है।
लफड़े तो पहले भी हुए लेकिन दिल में न कोई सिकवा था।
दोनों के बीच आयी लड़की दोस्ती के बीच न कोई रिस्ता था।
ज़िन्दगी जीने की वजह बन गया मेरा यार
सब कुछ सीखा मैंने सीखा करने उस से प्यार।
लोगो की न सुनी मैंने सपने देखे खुल के
पूरा करने की ना हिमंत दिल की बात बताऊं खुल के।
लिखा था मैंने पहला गाना खुद को मान कर
शौक इतना पाल लिया है मैंने सब कुछ ठान कर।
कोई रोकने वाला न था मुझको मैं चलता एक निशान पर।
हिम्मंत ना है मेरे अंदर खुल के मैं जीया नहीं,
पढने लिखने वाला लोंडा आज तक कुछ खास किया नहीं।
मैं हूँ वो इंसान जो सपने लेता था पैसों से जीने के,
घरवाले भी कहते थे बेटा अच्छा होगा पढ़ लिखने से।
आज तक मुझे कुछ समझ नहीं आया ,
क्या मैंने खोया और क्या मैंने पाया।
सवाल आते है मन में हज़ारों पूछने की कोई वजह नहीं।
समझाने वाले समझातें है हमेशा लेकिन सोचने की कोई वजह नहीं।
ज़िन्दगी जीने के लिए मान नहीं ठान लेना चाहिए।
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