तुम्हारी भाभी भी क्या मस्त होती।

                                                शायरी 

चलते चलते राहों मे मिल गयी वो हंसी ,
जिसका जिकर कभी मेरे ख्यालों मैं हुआ करता था। 
किस्मत का कनेक्शन तो देखो ,
आज वो सामने से ऐसे निकल गयी जैसे मैं किसी और पे मरता था। 




न जाने क्यों उसकी आदत हो गयी ,
अब तो रोज मिलने का मन करता है। 
कैसे समझाऊ उसको मैं कैसे जी रहा हूँ ,
अब तो दिल को संभालकर  रखना पड़ता है। 



वो सामने से क्या गुजरी ,
दिल ने उसको अपना मान लिया। 
लिफ्ट तो उसके दिल ने मेरे दिल से माँगी ,
लेकिन उसको अपने दिल मे किसी और ने बिठा लिया। 




आसमान में बादल होते हैं पर बरसात नहीं होती ,
दिल में चाहत होती है पर मुलाक़ात नहीं होती। 
यूँ तो राहों में  चलते चलते किसी का भी दिल संभाल लें ,
लेकिन उनके दिलों में तुम्हारे दिल जैसी बात नहीं होती।    




एक  फूल अजीब था ,कभी हमारे भी करीब था। 
जब हम उसे चाहने लगे  चला कि वो किसी और का नसीब था। 




जरा सी  ज़िनदगी है, अरमान बहुत है। 
हमदर्द नहीं कोई इंसान बहुत है। 
दिल के दर्द को सुनाये किसको ,
जो दिल के करीब है वो अनजान बहुत है। 

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