पाना है तो देना शुरू कीजिए.(if you want to start giving)

एक  पुराने लोकगीत मे  एक प्यासे मुसाफिर को मरुभूमि मे  पानी का पंप मिल जाता है। लेकिन,  उसमे लगे एक पर्चे पर लिखा होता है कि ,इसे चलाने के लिए पहले पानी डालें जो कहीं पास मे  एक बर्तन मे  भरा है और ज़मीन मे  गडा है। मतलब यह  की , पानी पीने  के लिए पहले  मेहनत करके उसे बाहर  निकालना होगा। अब यह मुसाफिर को तय करना होता है कि यह बर्तन  निकालकर  प्यास भुझे ले या फिर उस थोड़े से पानी को डालकर बदले मे खूब सारा पानी निकाल ले। 
ज़िन्दगी भी ऐसी ही है इसमें आप कुछ दिए बिना ,कुछ मनचाहा पाने की उम्मीद नहीं कर सकते। 
इसलिए खुले मन से देने की आदत डालिये और ये भरोसा रखिये की फल निशिचत रूप से मिलेगा। 
जैसे की महापुरुष "फ्रैंक क्रेन  ने कहा  था :  "अगर आप बहुत ज्यादा भरोसा करते हैं तो आप धोखा खा सकते हैं ,लेकिन आप पर्याप्त भरोसा नहीं करते हैं ,तो आप सुख से नहीं जी पाएँगे "। 
तो ऐसी ज़िन्दगी जियें, जिसमे भले ही कुछ देने के बाद भी आपको धोखा मिले , लेकिन वह बिना कोशिश  वाली  दर्दनाक ज़िन्दगी से बेहतर ही होगी। 

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