YAAR DHOKHEBAAZ

छोड़ दिया तूने अपने हिसाब से, मेरे बारे में सोचा तक नहीं। कहाँ गयी वो प्यार वाली बातें, अब तो वो भी होंठो तक नहीं। 
काश तेरे इस जूठे इशक का  पता होता,तो तेरा  निशान मेरी ज़िन्दगी में नहीं होता।क्या उखाड़ लिया तूने मुझे छोड़ के,,ज़िन्दगी जीना भी कोई असान नहीं होता। 

क्यों ये दिल अभी भी तुझे याद करता है ,बस यही जान ने के लिए तुझसे बात करता है। कभी कभी लगता है तू याद करता है उन बातों को,जिन बातों की सींमा कभी ख़तम नहीं हुयी। फिर भी तू झूठ बोलता है मैं भूल गया हूँ,ऐसा झूठ बोलना कोई धोखेबाज़ी नहीं हुयी। 


मैं अपनी ज़िन्दगी के वो पल भूलना चाहती हूँ जो तेरे साथ बिताये थे।कमीना था तू और तेरा प्यार ये सोच के अब जीना चाहती हूँ।

 तूने तो हद ही पार कर दी मुझे इतना रुलाया मुझे मालूम है तूने इतना क्यों तडफाया। विशवास नहीं था मुझ  पे जो अब कभी नहीं होगा ,टूट चूका है वो दिल जो अब कभी नहीं जुड़ेगा। पागल समझ सकती हूँ तेरी इस आबाज को,जिसने मुझे इतना रुलाया है।   

  

  

      

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