HIP HOP KI DUKAAN

कैसे कहूँ तुझको मैं बर्बाद हुआ, थोड़ा फसा लड़की के चक्कर में फिर भी आज़ाद हुआ। डरने की कोई बात नहीं मेरे यारों मेरे दिल को सम्भालो। मैं बन्दा हूँ शरीफ कोई जुगाड़ तो निकालो। बातें तो सीधी करूं कोई मेरा हाल तो बता दो। मेरी तो कोई गलती नहीं  यारों टाइम निकलता नहीं। सूरज को देख देख चाँद पिघलता नहीं,तारों से कह दू की रात को ना आया करो ,लेकिन मेरी बात कोई समझता नहीं। परेशान न हो बेबी यार तेरा खेल खेलता कमाल का। तू भी हंस जायेगी जवाब दूंगा मैं तेरे सवाल का। 
बर्बादी  तो शुरू कब से हुयी पर बर्बाद हुआ मैं अपना दिल तोड़कर। पहाड़ो में रहने वाला सोच ऊँची रखता जो भी सीखा हूँ  कुछ चीजें खो कर। 

आयी मेरे सपनो में हिप हॉप की दूकान ,उसको चलाना चाहता हूँ मैं खुले आसमान में। लाइफ मैं कभी भी किसी की बात नहीं मानी ,वहीँ से शुरू हुयी मेरी लिखने की कहानी। हिप हॉप का तो मैं पहले से ही दीवाना था,नए जमाने में तो सब जीना चाहते हैं पर,मैं पुराने जमाने में जाना चाहता था।    



    

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