मैं जानता हूँ

मैं जानता हूँ तेरे दिल में जो बात है, तू बताएगी नहीं फिर भी मैं पहचानता हूँ। 

गलती तो हर इंसान करता है पर मेरे दिल की क्या गलती थी,सामने  होकर भी बात न हो पायी, उस दर्द को भी मैं पहचानता हूँ। 

मैं जानता हूँ तेरे दिल में जो बात है, तू बताएगी नहीं फिर भी मैं पहचानता हूँ। 

शायद कोई कमी थी मुझमे तभी तो तुमने कोशिश नहीं की।

मैंने दिल से लाख बार बोला तभी तो उसने कोई शिकायत नहीं की। 
किस्मत में जो लिखा था वो तो हो गया,

लेकिन तेरी आंखों की बातों को में जानता हूँ।  

तेरे दिल में जो बात है, तू बताएगी नहीं फिर भी मैं पहचानता हूँ। 

  

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